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बाज़ी का राज़
बाज़ी का राज़
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बाज़ी का राज़

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दस साल जेल में बिताने के बाद, धोखेबाज़ी में माहिर नायक आज़ाद होता है। पर बाहर आते ही उसे पता चलता है कि उसका बेटा जुए के जाल में फंसकर बर्बाद हो रहा है। बेटे को बचाने के लिए नायक को अपने हुनर का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो उसे एक पुरानी साज़िश और उसके पिता के असली कातिल के सामने ले आता है। अब यह बाज़ी सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि इंतकाम और परिवार के लिए है। क्या वह अपने दुश्मन को मात देकर सब कुछ वापस जीत पाएगा?