वो माँ नहीं, इंसान भी नहीं
एक डॉक्टर बच्चे को बचाते हुए डूब जाती है और जलपरी दुनिया में नौकरानी बनकर जागती है, जहाँ वह जलपरी शिशुओं के विचार सुन सकती है। तीन शाही शिशु लगातार रोते हैं—सबको लगता है भूख लगी है, पर वह सुनती है: “कीड़े मेरे गलफड़े खा रहे हैं!” वह राजा का भरोसा जीतती है, तभी उसकी मरी हुई बहन “लौट” आती है। उसे देखते ही बच्चे काँप उठते हैं। उनके विचार एक सिहरनभरा सच खोलते हैं: यह स्नेही माँ इंसान नहीं।