ताबूत बंद, धोखेबाज़ बेनकाब
पति के नकली अंतिम संस्कार के दिन वह फिर जन्म लेती है। वह ताबूत सील कर उसे अपनी प्रेमिका का गला घोंटने पर मजबूर करती है, सबके सामने साजिश उजागर करती है और अमीर वारिसा होने की असली पहचान दिखा देती है। अदालत में झूठे इल्ज़ाम तोड़कर खलनायकों को कानून के कटघरे तक पहुंचाती है और आखिरकार घर लौटने का रास्ता फिर से पा लेती है।