चुराया हुआ जीवन
IAS में देशभर में सातवां रैंक लाने वाला विद्वान राजेश अपने जिगरी दोस्त रागेश की धोखेबाज़ी का शिकार बनता है—रागेश उसकी पहचान चुरा लेता है, उसे अपाहिज कर देता है और उसकी गर्भवती पत्नी प्रिया को भी छीन लेता है। 21 साल बाद राजेश मीरा के साथ इंसाफ मांगने लौटता है और अर्जुन से मिलता है, जो रागेश को अपना मसीहा मानता है। एक जैसी अंगूठी दबी हुई सच्चाई को बाहर खींचने लगती है।